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एजुस्पर्मिया (निल शुक्राणु) रोग क्या है.

Nil Sperm Count: निल शुक्राणु (एजुस्पर्मिया) के कारण पुरुषों में नि-संतानता की समस्‍या आंकड़ों में देखी जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, निल शुक्रणु मुख्‍यत: दो प्रकार के होते हैं, जिनका आयुर्वेदिक तरीकों से उपचार किया जा सकता है।
वर्तमान समय में पिता बनने की इच्‍छा बड़ी परेशानियों के बाद ही पूरी होती है। आजकल पुरुषों में सेक्‍सुअल हेल्‍थ (Sexual Health) से जुड़ी कई ऐसी परेशानियां देखने को मिल रही हैं, जिसके कारण पुरुष नि-संतानता (Male Infertility) की समस्या का शिकार होते जा रहे है। वर्ष 2013 में पुरुषों के शुक्राणुओं पर किए गए अध्‍ययन के अनुसार, पहले की अपेक्षा वर्तमान में पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्‍या में कमी (Nil Sperm Count) आई है। जिसे एजुस्पर्मिया या निल शुक्राणु (Azoospermia Or Nil Sperm Count) के रूप में देखा जाता है।

एजुस्पर्मिया या निल शुक्राणु क्या है?

जब पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की कमी (Nil Sperm Count) हो जाती है या शुक्राणुओं की उपस्थिति नगण्‍य होती है तो इस स्थिति को एजुस्पर्मिया कहते हैं। एजुस्पर्मिया पुरुषों के वीर्य में होने वाली एक बहुत बड़ी समस्या है जोकि पुरुष निःसंतानता का प्रमुख कारण है। विशेषज्ञों के अनुसार, एजुस्पर्मिया का सीधा संबंध पुरुष निःसंतानता से है।

एजुस्पर्मिया के प्रकार -

1. ऑब्सट्रक्टिव एजुस्पर्मिया (Obstructive Azoospermia)- ऑब्सट्रक्टिव एजुस्पर्मिया में शुक्राणु तो बनते है परंतु वह अंडकोष के अवरुद्ध हो जाने के कारण वीर्य तक पहुचने में असमर्थ होते है।

2. नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजुस्पर्मिया (Non-obstructive Azoospermia)- नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजुस्पर्मिया जिन पुरुषों को होता है उनमें शुक्राणु नहीं बनते हैं या फिर न के बराबर बनते है। नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजुस्पर्मिया में शुक्राणु अंडकोष से निकलने में असमर्थ होते है।

एजुस्पर्मिया (निल शुक्राणु) के कारण -

आयुर्वेद के अनुसार एजुस्पर्मिया होने के कई कारण हो सकते हैं:

  • संक्रमण
  • अंडकोष में चोट लगना।
  • आनुवंशिक
  • नसबंदी
  • सर्जरी
  • जीवनशैली एवं अधिक शराब, धूम्रपान का सेवन इत्यादि।

एजुस्पर्मिया (निल शुक्राणु) का आयुर्वेदिक उपचार -

आयुर्वेदिक चिकित्सा दुनिया की सबसे प्राचीनतम चिकित्सा है। आयुर्वेदिक औषधियों के माध्यम से पुरुष वीर्य के शुक्राणुओं (स्पर्म काउंट) को बढ़ाया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति शरीर तथा मन की ऊर्जा में संतुलन स्थापित करती है। आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति का एक भाग है अभ्यंग (मालिस) जिससे संपूर्ण शरीर के रक्त संचार में सुधार होता है।

आयुर्वेद के अनुसार हर किसी को प्रतिदिन अभ्यंग करना चाहिए। अभ्यंग करने से पुरुष के शरीर में ठीक प्रकार से रक्त का संचार होता है। रक्त संचार होने से पुरुष शरीर में शुक्राणु में तेजी से वृद्धि होती है। अभ्यंग के द्वारा शरीर के तीनों दोष (वात,पित्त एवं कफ दोष) को नियंत्रित किया जाता है।

अगर आप भी निल शुक्राणु  कि समस्या  से परेशान है तो ऑनलाइन परामर्श क लिए तुरंत फ़ोन करे (8010977000)-

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